आईपीएल सीजन खत्म होते ही सिनेमाघरों में बड़ी फिल्मों की दस्तक शुरू हो गई है। इसी कड़ी में तेलुगु सुपरस्टार राम चरण और जाह्नवी कपूर अभिनीत बहुप्रतीक्षित पैन इंडिया फिल्म ‘पेद्दी’ रिलीज हुई है। निर्देशक बुची बाबू सना की इस ग्रामीण खेल-नाटक फिल्म से दर्शकों को काफी उम्मीदें थीं। फिल्म कुछ मामलों में प्रभावित करती है, लेकिन इसकी असमान पटकथा और लंबा रनटाइम इसे अपेक्षित ऊंचाइयों तक पहुंचने से रोक देता है।Peddi Movie Review
कहानी
फिल्म की कहानी 1980 के दशक के एक ग्रामीण परिवेश में रहने वाले मजदूर पेद्दी (राम चरण) के इर्द-गिर्द घूमती है। क्रिकेट का जुनूनी पेद्दी अपने गांव और समुदाय को पहचान दिलाने का सपना देखता है। ऊंची जाति और प्रभावशाली वर्ग द्वारा लगातार अपमान और भेदभाव का सामना करने वाला पेद्दी सम्मान की लड़ाई को अपना जीवन लक्ष्य बना लेता है।
पहले क्रिकेट और फिर कुश्ती के मैदान में अपनी पहचान बनाने की कोशिश करते हुए वह कई संघर्षों और हादसों से गुजरता है। इसी दौरान उसकी प्रेम कहानी, सामाजिक संघर्ष और गांव के विकास की जिद कहानी का हिस्सा बनते हैं। फिल्म पहचान, आत्मसम्मान और सामाजिक न्याय जैसे विषयों को छूती है, लेकिन कई बार एक साथ बहुत कुछ कहने की कोशिश में भटक जाती है।
अभिनय
फिल्म का सबसे मजबूत पक्ष राम चरण हैं। उन्होंने पेद्दी के किरदार में पूरी जान डाल दी है। चाहे एक्शन हो, भावनात्मक दृश्य हों या फिर क्रिकेट और कुश्ती के मैदान के दृश्य, हर जगह उनका समर्पण साफ दिखाई देता है। उनका शारीरिक परिवर्तन, संवाद अदायगी और स्क्रीन प्रेजेंस दर्शकों को प्रभावित करती है।
शिव राजकुमार ने गुरु की भूमिका में प्रभावशाली काम किया है। दिव्येंदु, रवि किशन, जगपति बाबू और बोमन ईरानी अपने-अपने किरदारों में प्रभाव छोड़ते हैं। वहीं जाह्नवी कपूर को सीमित और कमजोर तरीके से लिखा गया है। उनका किरदार कहानी में अपेक्षित गहराई नहीं पा सका और कई जगह केवल सजावटी पात्र बनकर रह जाता है।Peddi Movie Review

निर्देशन और पटकथा
निर्देशक बुची बाबू सना ने एक बड़े कैनवास पर फिल्म बनाने की कोशिश की है। फिल्म में सामाजिक संघर्ष, खेल, प्रेम कहानी, पारिवारिक भावनाएं और एक्शन सभी मौजूद हैं, लेकिन इन तत्वों के बीच संतुलन नहीं बन पाता।
पहला भाग अपेक्षाकृत धीमा है और कई दृश्य अनावश्यक रूप से लंबे लगते हैं। दूसरा भाग कहानी को गति देता है और कुछ दमदार एक्शन तथा भावनात्मक दृश्य दर्शकों को बांधे रखते हैं। हालांकि बार-बार भावनात्मक दृश्यों का दोहराव और कई उपकथाओं का अधूरा विकास फिल्म की सबसे बड़ी कमजोरी बन जाता है।
तकनीकी पक्ष
तकनीकी रूप से फिल्म बेहद मजबूत है। आर. रत्नवेलु की सिनेमैटोग्राफी ग्रामीण परिवेश की खूबसूरती और संघर्ष दोनों को प्रभावशाली ढंग से पर्दे पर उतारती है। एरियल शॉट्स, लोकेशंस और भव्य सेट फिल्म को दृश्यात्मक रूप से आकर्षक बनाते हैं।Peddi Movie Review
ए.आर. रहमान का संगीत फिल्म की ताकत है। ‘चिकिरी’ जैसे गीत पहले ही लोकप्रिय हो चुके हैं और बड़े पर्दे पर उनका प्रभाव और बढ़ जाता है। बैकग्राउंड स्कोर भी कई दृश्यों को ऊंचाई देता है।
क्या अच्छा है?
- राम चरण का शानदार अभिनय
- प्रभावशाली सिनेमैटोग्राफी
- दमदार एक्शन दृश्य
- ए.आर. रहमान का संगीत
- पहचान और सम्मान जैसे सामाजिक मुद्दों को उठाने का प्रयास
क्या खटकता है?
- लगभग तीन घंटे का लंबा रनटाइम
- असमान और बिखरी हुई पटकथा
- कमजोर रोमांटिक ट्रैक
- जाह्नवी कपूर के किरदार का सीमित उपयोग
- कुछ स्थानों पर जरूरत से ज्यादा मेलोड्रामा
निष्कर्ष
‘पेद्दी’ एक ऐसी फिल्म है जो अपने नायक की तरह बड़े सपने देखती है, लेकिन मंजिल तक पूरी मजबूती से नहीं पहुंच पाती। फिल्म कहानी कहने में कोई नया प्रयोग नहीं करती, लेकिन राम चरण का समर्पित अभिनय इसे देखने लायक बनाता है। अगर आप राम चरण के प्रशंसक हैं या ग्रामीण पृष्ठभूमि वाले भावनात्मक स्पोर्ट्स ड्रामा पसंद करते हैं, तो यह फिल्म एक बार देखी जा सकती है। हालांकि मजबूत पटकथा और बेहतर संपादन इसे कहीं अधिक यादगार बना सकते थे।
