सिम कार्ड जारी करने में बायोमेट्रिक पहचान अनिवार्य होगी
नयी दिल्ली। देश में तेजी से बढ़ रहे डिजिटल अरेस्ट स्कैम पर रोक लगाने के लिए केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। गृह मंत्रालय के अधीन भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C) ने सुप्रीम कोर्ट में विस्तृत एक्शन प्लान पेश किया है। इस योजना का उद्देश्य साइबर ठगी पर कड़ा नियंत्रण और डिजिटल सुरक्षा को मजबूत करना है।Biometric Verification for SIM Cards
रिपोर्ट के अनुसार, टेलीकॉम विभाग, आरबीआई, तकनीकी कंपनियों और जांच एजेंसियों के बीच समन्वय स्थापित कर बहु-स्तरीय कार्रवाई की जा रही है। हाल ही में वॉट्सएप ने पिछले 12 हफ्तों में लगभग 9,400 ऐसे अकाउंट्स बंद किए हैं, जो पुलिस या सरकारी लोगो का दुरुपयोग कर लोगों को ठग रहे थे। कंपनी जल्द ही नए सुरक्षा फीचर्स लाने की तैयारी में है, जिनसे संदिग्ध कॉल्स पर यूजर्स को चेतावनी मिलेगी और फर्जी प्रोफाइल तस्वीरें स्वतः छिप जाएंगी।

दूरसंचार विभाग ने टेलीकॉम कंपनियों के साथ मिलकर एक नई व्यवस्था प्रस्तावित की है, जिसके तहत किसी भी संदिग्ध सिम कार्ड को पहचान के दो से तीन घंटे के भीतर ब्लॉक किया जा सकेगा। वहीं, केंद्रीय जांच एजेंसी सीबीआई ने तय किया है कि 10 करोड़ रुपये से अधिक की साइबर ठगी के मामलों की जांच वह स्वयं करेगी। हाल ही में दिल्ली में एक मामले में 22.92 करोड़ रुपये की ठगी सामने आई है।Biometric Verification for SIM Cards
सरकार अब बायोमेट्रिक पहचान सत्यापन प्रणाली (BIVS) लागू करने की तैयारी में है, जिसके तहत सिम कार्ड जारी करने की प्रक्रिया को रियल टाइम में मॉनिटर किया जाएगा। इसे दिसंबर 2026 तक लागू करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके साथ ही आरबीआई ने बैंकों को नया मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) जारी करते हुए संदिग्ध लेन-देन को तुरंत रोकने के निर्देश दिए हैं, ताकि मनी म्यूल नेटवर्क पर प्रभावी रोक लगाई जा सके।Biometric Verification for SIM Cards
सरकार के इस कदम को साइबर सुरक्षा की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है, जिससे डिजिटल ठगी के मामलों में बड़ी कमी आने की उम्मीद है।
